फिल्म ''शाह -ए - मिश्र '' १९४६
-अनिल वर्मा
सन १९४५-४६ तक फिल्मो में संघर्ष के कठिन दिनों में अजीत की मुलाकात एक व्यक्त्ति गोविंदराम सेठी से हुई ,जो मूक फिल्मो के दौर से भारतीय सिनेमा से जुड़े हुए थे।,उसने अजीत से वायदा किया कि जब भी उसे मौका मिलेगा वह उन्हें हीरो बनाएगा। एक सुबह सेठी ने उन्हें बुलाकर साथ चलने को कहा , तब अजीत को यह पता लगा कि विष्णु सिनेटोन जो केवल धार्मिक फिल्मे बनाती थी वह एक स्टंट फिल्म बनाने जा रही है, इस तरह अजीत को हीरो के रूप में अपनी पहली फिल्म "शाह-ए -मिश्र '' मिल गयी ,इसमें सहायक निर्देशक केदार शर्मा थे , जिनसे अजीत की अच्छी दोस्ती हो गयी थी।यह फिल्म १९४६ में आई थी , इसमें उनकी नायिका गीता बोस थी . इस समय तक अजीत अपना मूल नाम हामिद खान ही फिल्मों में भी उपयोग करते थे। किस्मत प्रोडक्शन की इस फिल्म को अनुभवी निर्देशक जी. आर. सेठी ने निर्देशित किया था , हालांकि यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर असफल रही , पर आकर्षक और सजीले व्यक्तित्व के दम पर अजीत फिल्मकारों को अपनी और आकृष्ट करने में सफल रहे ।
इस फिल्म में गीत रूपबानी के थे और संगीत निर्देशन शांति कुमार देसाई का था। फिल्म में निम्नलिखित गीत थे -
१-फूलो को छेड़कर .... २-खामोश रहे ए हुस्न तेरे बन्दे ....३-दिल बेचता हूँ सरकार ....४- गा रही है जिंदगी ...
५- जमीन तेरी फलक तेरा ....६-ए रहमत बारी ....७-दुनिया की जन्नत....८- इंक़लाब जिंदाबाद ....

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