शम्मी कपूर की वो यादें ,वो कसक
- अनिल वर्मा
आज के ही दिन १४ अगस्त २०११ को भारतीय फिल्मों के सदाबहार अभिनेता शम्मी कपूर इस दुनिया को अलविदा कर गए थे . वो मेरे फेवरेट हीरो थे। सदैव से ही अपने हर पसंदीदा व्यक्ति से मिलने की मेरी महत्वाकांक्षा रही है, चाहे वो कितनी भी बड़ी शख्सियत हो । मै बचपन से शम्मी कपूर जी की फिल्मों का दीवाना था , मैंने उनकी हर फिल्म कई कई बार देखी ,पर उनसे मिलने का मेरा ख्याब अधूरा रहा गया , इसे मै अपनी एक बड़ी नाकामयाबी मानता हूँ .
अक्सर दीवानगी के आलम में यूँ होता है कि कईं बार कोई प्रिय इतना करीब लगने लगता है कि ऐसा लगता है कि मानों हम उसे छू सकते है , पर आगे हाथ बढ़ने पर वो दूर और दूर होता जाता है , मेरी यही दास्ताँ शम्मी कपूर जी के साथ हुई , यह मेरी बदनसीबी ही है कि मै दो बार उनके एकदम करीब पहुंच कर भी उनसे न मिल सका। करीब १५-१६ साल पहले की बात है , जब शम्मी कपूर जी बहुत ज्यादा बीमार होने से मुंबई के बीच कैंडी हॉस्पिटल मे भर्ती थे , मै रक्षा बंधन पर मौका पाकर मुंबई पहुंच गया था , सब काम छोड़कर मैंने शम्मी जी से मुलाकात का निश्चय किया , हालाकिं उनसे मिलना यूँ सहज न था ,पर मै योजनाबद्ध रूप से शूटबूटेड, आखों पर रंगीन चश्मा लगाकर बेहतरीन तैयार होकर उस अस्पताल में पंहुच गया , जहाँ शम्मी कपूर के भर्ती होने की खबरे अख़बारों की सुर्ख़ियों में छप रही थी ,वहां काफी मजबूत सिक्योरिटी थी और यहाँ मेरे पास न तो कोई पॉस था ,न कोई एप्रोच , परन्तु पूरे आत्मविश्वास से
लबरेज मै
खटाखट सभी सिक्योरिटी बैरियर को सहजता से पार करते हुए आगे बढ़ता चला गया , वो लोग भी शायद
मुझे कोई बड़ी हस्ती समझ रहे थे , अब मै अस्पताल के 8th फ्लोर पर उस प्राइवेट रूम के
सामने था जहाँ शम्मी कपूर भर्ती थे , कांच के दरवाजे से अन्दर बैड पर मेरे फेवरेट हीरो शम्मी कपूर नज़र आ रहे थे , मैंने वहीं से उन्हें हाथ जोड़कर अभिवादन किया , वो भी हाथ उठकर जबाब दिए , मै उनसे मिलने
की कल्पना से बेहद रोमांचित था , इधर सिक्योरिटी गार्ड ने मेरे रौबदार तरीके
से जज़ बताने पर गेट भी खोल दिया , पर मेरे दुर्भाग्य से अचानक वहां शम्मी कपूर
जी की पत्नी राजकुमारी नीला आ गयी , वो बोली कि ' अभी आप शम्मी जी नहीं मिल
सकेंगे , आप उनके ठीक होने पर घर आईयेगा ', मेरे काफी अनुनय विनय करने पर भी वो देवी
ना मानी, आखिर हताश होकर मै वापस लौट गया। इस घटना के करीब ५ साल बाद मै फिर मुंबई मे था , इस बार मै सीधा ही उनके मालाबार हिल्स स्थित उनके शानदार बंगले पर चला गया , उनका पी. ए.उनसे मिलाने के लिए मान गया , पर मेरी किस्मत इस बार भी रूठी हुई थी , फिर उनकी पत्नी नीलादेवी के वहां प्रगट जाने से एक बार वहीं कहानी दोहरायी गई , उन्होंने फिर किसी बहाने से मुझे शम्मीजी से मिलने से वंचित कर दिया।
आज शम्मी जी हमारे बीच नहीं है , उनकी फिल्मो की दिलकश अदाकारी और जिंदादिली से परिपूर्ण यादें तो सदा साथ रहेगी , पर उनके पास पहुंच भी मिल ना पाने की वो कसक हमेशा सालती रहेगी।
- अनिल वर्मा
