अलविदा अलविदा
-अनिल वर्मा
' उदास है आसमां के चाँद सितारे , बुझे बुझे है जहाँ के नज़ारे ,
हसीं बहारे भी बेपनाह रो रही है ,अलविदा ये महफ़िल कह रही है ''
जब अमिता जी के दुनिया से अलविदा हो जाने के बारे में जब अश्वनी से दुखद खबर मिली , तो सहसा यह विश्वास ही नहीं हुआ कि हमारे क्लास की आन ,बान और शान अमिता दुबे (कानूनगो ) अब हमारे बीच नहीं रही है . गत २० मई २०१४ को उनका दुःखद निधन हो गया।
अमिता जी हमारे साथ सन १९७७ से १९८० तक क्लास ९ से ११ तक साथ पढ़ी थी , पढ़ाई में वह सर्वोत्तम थी ही , साथ ही वो तीनो साल हमारी क्लास की मॉनिटर रही , निसंदेह वो क्लास की सबसे सम्मानित विद्यार्थी थी , उनका लम्बा कद , चश्मे के साथ मुस्कराहट से खिला उनका खूबसूरत चेहरा,मुझे याद आज भी है। मैंने सन १९८० के बाद उन्हें देखा भी नहीं ,पर वह हमारे स्कूल जीवन की सुनहरी यादों का हिस्सा थी , उनका हर कार्य और आचरण आदर्श रूप में रहता था , वो बहुत ही विनम्र ,मृदुभाषी और शालीन थी , हम लोगो को उन पर गर्व था और सबके मन में उनके लिए बहुत सम्मान था ,
-अनिल वर्मा
' उदास है आसमां के चाँद सितारे , बुझे बुझे है जहाँ के नज़ारे ,
हसीं बहारे भी बेपनाह रो रही है ,अलविदा ये महफ़िल कह रही है ''
जब अमिता जी के दुनिया से अलविदा हो जाने के बारे में जब अश्वनी से दुखद खबर मिली , तो सहसा यह विश्वास ही नहीं हुआ कि हमारे क्लास की आन ,बान और शान अमिता दुबे (कानूनगो ) अब हमारे बीच नहीं रही है . गत २० मई २०१४ को उनका दुःखद निधन हो गया।
अमिता जी हमारे साथ सन १९७७ से १९८० तक क्लास ९ से ११ तक साथ पढ़ी थी , पढ़ाई में वह सर्वोत्तम थी ही , साथ ही वो तीनो साल हमारी क्लास की मॉनिटर रही , निसंदेह वो क्लास की सबसे सम्मानित विद्यार्थी थी , उनका लम्बा कद , चश्मे के साथ मुस्कराहट से खिला उनका खूबसूरत चेहरा,मुझे याद आज भी है। मैंने सन १९८० के बाद उन्हें देखा भी नहीं ,पर वह हमारे स्कूल जीवन की सुनहरी यादों का हिस्सा थी , उनका हर कार्य और आचरण आदर्श रूप में रहता था , वो बहुत ही विनम्र ,मृदुभाषी और शालीन थी , हम लोगो को उन पर गर्व था और सबके मन में उनके लिए बहुत सम्मान था ,
विनम्रता और सौम्यता से परिपूर्ण गरिमामयी प्रभावशाली व्यक्तित्व अमिता की
अनूठी पहचान थी, उनका जन्म ३० अक्टूबर १९६३ को हुआ था और १८ जनवरी १९८९ को
उनका विवाह हुआ था , ,उनकी २ बेटी हैं , वो
अपने खुशहाल परिवार के साथ विजय नगर इंदौर में रहती थी।
क्लास के री-यूनियन फक्शन के लिए उनमें काफी उत्साह था , हम उनके सहयोग से इस दिशा में आगे बढ़ रहे थे .उनका असमायिक निधन हम सब के लिए बेहद दुखद है, उन्होंने गुजराती समाज स्कूल रतलाम से 11th करने के बाद रतलाम से बी.एस सी. किया था ,फिर इंदौर के गवर्नमेंट गर्ल्स कॉलेज से केमिस्ट्री में M.Sc. किया था ।
उनके निधन से हमने अपनी एक शानदार सहपाठी को हमेशा के लिए खो दिया है , ग्रुप की ओर से भेजे गए संवेदना सन्देश पर अमिता जी के पति श्री आशुतोष कानूनगो जी ने यह जबाब भेजा था कि .... ''अमिता के निधन पर आपके द्वारा प्रकट संवेदना के लिए ह्रदय से आभार । अमिता को पत्नी एवं माँ के रूप में खोना मेरे व बच्चों के लिए अपूर्णीय क्षति है।वे अपनी सुनहरी यादों के साथ सदा हमारे बीच रहेंगी।''आशुतोष जी ने बताया कि अमिता जी पिछले ५ वर्षो से कैंसर से पीड़ित थी , पर यह उनकी जिंदादिली और जीवटता थी कि वह किसी को भी इसके बारे में नहीं बताती थी और मुश्किल हालात में भी खुश और सक्रिय रहने की कोशिश करती थी ।वह अंतिम दिनों में जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष करती रही ,आखिर मौत ने बाज़ी मार ली।
मैंने उन्हें स्कूल छोड़ने के ३२ साल बाद फेस बुक के माधयम से खोजा था वह क्लास के री-यूनियन फंक्शन के लिए गर्ल्स क्लासमेट को खोजने में काफी मदद कर रही थी ,मेरी अमिता जी से अंतिम बार करीब ४ माह पहले फ़ोन पर बात हुए थी , काश हमे उनकी सिमटती हुई जिंदगी का रंच मात्र भी अहसास होता, तो हम जल्दी ही सभी मित्रो को एकत्र कर पुनर्मिलन समारोह आयोजित कर लेते , कम से कम मिल ही लेते , मन में एक कशिश रह गई . अमिता ने दुनिया को अलविदा कह दिया है , पर हम सब की यादों में वह सदा अमर रहेगी। परम पिता ईश्वर से प्रार्थना है कि उनकी आत्मा को शांति प्रदान करे और उनके परिवार को यह असीम दुःख सहन करने की शक्ति प्रदान करे.
अलविदा अमिता..........
'' ना पीछे मुड़कर देखों ना आवाज़ दो मुझको ,
बड़ी मुश्किल से सीखा है मैंने अलविदा कहना। ''
क्लास के री-यूनियन फक्शन के लिए उनमें काफी उत्साह था , हम उनके सहयोग से इस दिशा में आगे बढ़ रहे थे .उनका असमायिक निधन हम सब के लिए बेहद दुखद है, उन्होंने गुजराती समाज स्कूल रतलाम से 11th करने के बाद रतलाम से बी.एस सी. किया था ,फिर इंदौर के गवर्नमेंट गर्ल्स कॉलेज से केमिस्ट्री में M.Sc. किया था ।
उनके निधन से हमने अपनी एक शानदार सहपाठी को हमेशा के लिए खो दिया है , ग्रुप की ओर से भेजे गए संवेदना सन्देश पर अमिता जी के पति श्री आशुतोष कानूनगो जी ने यह जबाब भेजा था कि .... ''अमिता के निधन पर आपके द्वारा प्रकट संवेदना के लिए ह्रदय से आभार । अमिता को पत्नी एवं माँ के रूप में खोना मेरे व बच्चों के लिए अपूर्णीय क्षति है।वे अपनी सुनहरी यादों के साथ सदा हमारे बीच रहेंगी।''आशुतोष जी ने बताया कि अमिता जी पिछले ५ वर्षो से कैंसर से पीड़ित थी , पर यह उनकी जिंदादिली और जीवटता थी कि वह किसी को भी इसके बारे में नहीं बताती थी और मुश्किल हालात में भी खुश और सक्रिय रहने की कोशिश करती थी ।वह अंतिम दिनों में जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष करती रही ,आखिर मौत ने बाज़ी मार ली।
मैंने उन्हें स्कूल छोड़ने के ३२ साल बाद फेस बुक के माधयम से खोजा था वह क्लास के री-यूनियन फंक्शन के लिए गर्ल्स क्लासमेट को खोजने में काफी मदद कर रही थी ,मेरी अमिता जी से अंतिम बार करीब ४ माह पहले फ़ोन पर बात हुए थी , काश हमे उनकी सिमटती हुई जिंदगी का रंच मात्र भी अहसास होता, तो हम जल्दी ही सभी मित्रो को एकत्र कर पुनर्मिलन समारोह आयोजित कर लेते , कम से कम मिल ही लेते , मन में एक कशिश रह गई . अमिता ने दुनिया को अलविदा कह दिया है , पर हम सब की यादों में वह सदा अमर रहेगी। परम पिता ईश्वर से प्रार्थना है कि उनकी आत्मा को शांति प्रदान करे और उनके परिवार को यह असीम दुःख सहन करने की शक्ति प्रदान करे.
अलविदा अमिता..........
'' ना पीछे मुड़कर देखों ना आवाज़ दो मुझको ,
बड़ी मुश्किल से सीखा है मैंने अलविदा कहना। ''
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